गुरुवार, 4 दिसंबर 2025

नवप्रभात का करते स्वागत




 नवप्रभात का करते स्वागत

बीती रजनी की अलस छोड़

जीवन संघर्ष से अमृत खोज

करुणा प्रेम दया का सोता

नदियों में बहता गंगाजल 

सोमवार, 17 नवंबर 2025

बातें अनकही


टूटे  तारे 

जिनका  अपना  है  एक  आसमान 

चाँदनी  की  धूप  में   लोट-पोट  

आकाशगंगा  में  भींगकर

नन्हें  से  चेहरे  मुस्कुराते  

दिन - रात  ।

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बुधवार, 5 नवंबर 2025

बेशकीमती खजाना तुम्हारे पास है

 



मुश्किलों की टूटी काँच का  

गुलदान बनाने की कला तुम्हारे पास है 

दूर दराज के इलाकों में नहीं

तनिक भीतर नजर उठाकर देखना

बेशकीमती खजाना तुम्हारे पास है ।


👉  जी भरकर जीए nature feel of soul


सोमवार, 3 नवंबर 2025

तारों के जाल में उलझी



क्षण भर रुका व्यतीत 

अवश्य ! पर नहीं

बंधना होता है पतंग को

उसकी डोर कभी न कभी

पीछे हाथ में रह जाती है

जो रेत मुट्ठी से धीरे - धीरे सरक जाती है

सच है , भागना भी उसके पीछे

मैदान गली - गली सँकरी गली

शनिवार, 25 अक्टूबर 2025

तितली



विगत   दिनों  के  प्रकाश  में

रजनी   के   रजत   हास   में

ओस  कणों   के   मृदुल  वास  में

फूलों   के   मधुर   पराग  में

झिलमिलाता   स्वप्न  चलते  जाने  का

पथ  पर   बिखरी   छटा    सलोनी

बंद   राहें    कोष्ठक   से   दरवाजे   खोल   दो

मंगलवार, 23 सितंबर 2025

इतना ही पल काफी है


इतना  ही  पल  काफी  है  

हार  और  जीत  इन  दोनों  से  पार

स्मृतियों  के  गुजरते  देश  में  जाने  को

बीते  लम्हे  की   खुशबू   ओढ़े   किसी  लिफाफे

की    तहे   परतों   को   खोलता  हुआ 

झरोखों   में    ढलता   दिन

प्रभात   का   अभिव्यंजक

पुलकों  में  समाविष्ट   मन  की   हलचल  का   तार 

मंगलवार, 9 सितंबर 2025

देख उसे जो मंद मंद मुस्काती थी ..!

Veena


वीणा आज रखी थी चुप 

छेड़े नहीं गए थे मधुर राग

उस पर , समय कुँठाव काली

चुप अंधेरे में खो गई थी

समाधिस्थ अंतर्मन में वो यों

रखी थी , बिन वादक के लय सजीव

विधुरनी हो गई थी 

नवप्रभात का करते स्वागत

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