विगत दिनों के प्रकाश में
रजनी के रजत हास में
ओस कणों के मृदुल वास में
फूलों के मधुर पराग में
झिलमिलाता स्वप्न चलते जाने का
पथ पर बिखरी छटा सलोनी
बंद राहें कोष्ठक से दरवाजे खोल दो
विगत दिनों के प्रकाश में
रजनी के रजत हास में
ओस कणों के मृदुल वास में
फूलों के मधुर पराग में
झिलमिलाता स्वप्न चलते जाने का
पथ पर बिखरी छटा सलोनी
बंद राहें कोष्ठक से दरवाजे खोल दो
नवप्रभात का करते स्वागत बीती रजनी की अलस छोड़ जीवन संघर्ष से अमृत खोज करुणा प्रेम दया का सोता नदियों में बहता गंगाजल