जीवन सुरभि .... अमर्त्य सुवासित रुप
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गुरुवार, 4 दिसंबर 2025
नवप्रभात का करते स्वागत
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नवप्रभात का करते स्वागत बीती रजनी की अलस छोड़ जीवन संघर्ष से अमृत खोज करुणा प्रेम दया का सोता नदियों में बहता गंगाजल
7 टिप्पणियां:
सोमवार, 17 नवंबर 2025
बातें अनकही
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टूटे तारे जिनका अपना है एक आसमान चाँदनी की धूप में लोट-पोट आकाशगंगा में भींगकर नन्हें से चेहरे मुस्कुराते दिन - रात । ...
1 टिप्पणी:
बुधवार, 5 नवंबर 2025
बेशकीमती खजाना तुम्हारे पास है
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मुश्किलों की टूटी काँच का गुलदान बनाने की कला तुम्हारे पास है दूर दराज के इलाकों में नहीं तनिक भीतर नजर उठाकर देख...
2 टिप्पणियां:
सोमवार, 3 नवंबर 2025
तारों के जाल में उलझी
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क्षण भर रुका व्यतीत अवश्य ! पर नहीं बंधना होता है पतंग को उसकी डोर कभी न कभी पीछे हाथ में रह जाती है जो रेत मुट्ठी ...
शनिवार, 25 अक्टूबर 2025
तितली
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विगत दिनों के प्रकाश में रजनी के रजत हास में ओस कणों के मृदुल वास में फूलों के मधुर पराग में झिलमिलाता स्वप्न ...
2 टिप्पणियां:
मंगलवार, 23 सितंबर 2025
इतना ही पल काफी है
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इतना ही पल काफी है हार और जीत इन दोनों से पार स्मृतियों के गुजरते देश में जाने को बीते लम्हे की खुशबू ओढ़े किसी ल...
10 टिप्पणियां:
मंगलवार, 9 सितंबर 2025
देख उसे जो मंद मंद मुस्काती थी ..!
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वीणा आज रखी थी चुप छेड़े नहीं गए थे मधुर राग उस पर , समय कुँठाव काली चुप अंधेरे में खो गई थी ...
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