शनिवार, 25 अक्टूबर 2025

तितली



विगत   दिनों  के  प्रकाश  में

रजनी   के   रजत   हास   में

ओस  कणों   के   मृदुल  वास  में

फूलों   के   मधुर   पराग  में

झिलमिलाता   स्वप्न  चलते  जाने  का

पथ  पर   बिखरी   छटा    सलोनी

बंद   राहें    कोष्ठक   से   दरवाजे   खोल   दो